लहसुन की खेती मुनाफे का सौदा है, लेकिन इसमें ‘साइज’ और ‘क्वालिटी’ ही सब कुछ है। अगर कंद (bulb) छोटा रह गया, तो भाव नहीं मिलेगा।

दिसंबर (आज की तारीख) के हिसाब से आप बुवाई के लिए थोड़े लेट हो चुके हैं, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर सबसे उपयुक्त समय होता है। फिर भी, अगर आप अभी शुरुआत करना चाहते हैं या अगली सीजन की तैयारी कर रहे हैं, तो यहाँ ‘बीज से बाजार’ तक की पूरी गाइड है।

1. सही समय और मौसम (Timing is Key)

  • आदर्श समय: 15 सितंबर से 15 नवंबर। (देरी से बुवाई करने पर कंद का आकार छोटा रह सकता है)।
  • तापमान: शुरुआत में ठंडा मौसम (पौधे की बढ़त के लिए) और बाद में शुष्क व गर्म मौसम (कंद पकने के लिए) चाहिए।

2. खेत की तैयारी और मिट्टी

  • मिट्टी: हल्की दोमट मिट्टी (Loamy soil) सबसे अच्छी है। भारी या चिकनी मिट्टी में कंद ठीक से फूल नहीं पाता।
  • जुताई: खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें। मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए ताकि जड़ें गहराई तक जाएं।
  • खाद (Base Dose): आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ 5-8 टन सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलाएं।
    • प्रो टिप: लहसुन को सल्फर (गंधक) बहुत पसंद है। बुवाई के समय खेत में 20-25 किलो बेंटोनाइट सल्फर प्रति एकड़ डालने से लहसुन की चमक और तीखापन (pungency) जबरदस्त आता है।

3. बीज का चयन और मात्रा (Seed Selection)

  • बीज दर: 1 एकड़ के लिए लगभग 2 से 2.5 क्विंटल कलियों (cloves) की जरूरत पड़ती है।
  • किस्में (Varieties): अपने क्षेत्र के हिसाब से चुनें।
    • ऊटी-1, जी-282 (यमुना सफेद-3), भीम (Bheema) पर्पल, यमुना सफेद-4 (G-323) भारत में काफी लोकप्रिय हैं।
  • बीज उपचार (Seed Treatment) – सबसे जरूरी: बुवाई से पहले कलियों को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम/लीटर पानी) के घोल में 10-15 मिनट डुबोकर उपचारित करें। इससे फंगस नहीं लगती।

4. बुवाई का तरीका (Sowing Method)

  • दूरी: कतार से कतार की दूरी 15 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।
  • गहराई: कलियों को 2-3 सेमी गहरा लगाएं। ध्यान रहे, कली का नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर हो।
  • बेड सिस्टम: अगर संभव हो तो ‘रेज्ड बेड’ (उठी हुई क्यारी) पर बुवाई करें, इससे पानी नहीं भरता और कंद बड़ा बनता है।

5. खाद और सिंचाई (Fertilizer & Water)

  • बुवाई के समय: NPK (12:32:16 या डीएपी) का प्रयोग करें।
  • यूरिया: बुवाई के 25-30 दिन बाद और 45-50 दिन बाद दो हिस्सों में यूरिया दें।
  • सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद। सर्दियों में 10-15 दिन के अंतराल पर पानी दें।
    • सावधानी: जब फसल पकने वाली हो (हार्वेस्टिंग से 15 दिन पहले), सिंचाई पूरी तरह बंद कर दें, वरना कंद खराब हो जाएगा और भंडारण (storage) में दिक्कत आएगी।

6. खरपतवार और रोग नियंत्रण

  • खरपतवार: लहसुन की जड़ें कमजोर होती हैं, इसलिए खरपतवार इसे जल्दी दबा देते हैं। बुवाई के 2-3 दिन के भीतर ‘पेंडिमेथालिन’ (Pendimethalin) का छिड़काव करें या समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • थ्रिप्स (Thrips): यह छोटा कीड़ा पत्तियों का रस चूसता है जिससे पत्ते मुड़ जाते हैं। इसके लिए ‘इमिडाक्लोप्रिड’ या ‘फिप्रोनिल’ का छिड़काव करें।

किसान भाई ध्यान दें (Secret to Success):

लहसुन की मोटाई बढ़ाने के लिए जब फसल 80-90 दिन की हो जाए, तब पौधों पर पोटेशियम (00:00:50) का स्प्रे करें और साथ में प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) जैसे कि ‘लिहोसिन’ (Lihocin) का प्रयोग कर सकते हैं। यह पत्तियों की ताकत को खींचकर कंद में भेज देता है, जिससे साइज अचानक बढ़ जाता है।

क्या आप जानना चाहेंगे कि लहसुन को हार्वेस्ट करने के बाद उसे लंबे समय तक स्टोर कैसे किया जाए ताकि बाद में ऊंचे दाम मिल सकें?

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