हाल ही में कृषि मंत्रालय द्वारा जारी 2025-26 के पहले अग्रिम अनुमानों (First Advance Estimates) के अनुसार, भारत में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन 714.1 मिलियन टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
यह रिकॉर्ड इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इस साल देश के कई हिस्सों में बाढ़ और अत्यधिक बारिश ने तबाही मचाई थी। इसके बावजूद उत्पादन का बढ़ना कृषि क्षेत्र के लिए एक विरोधाभासी लेकिन सुखद खबर है।
यहाँ विस्तार से बताया गया है कि ज्यादा बारिश ने कैसे इस रिकॉर्ड को संभव बनाया और किन फसलों ने इसमें सबसे बड़ा योगदान दिया:
1. 714 मिलियन टन का गणित: क्या है इसमें शामिल?
यह आंकड़ा केवल अनाज (foodgrains) का नहीं है, बल्कि इसमें गन्ना, तिलहन और अन्य वाणिज्यिक फसलें भी शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा हिस्सा गन्ने का है।
- गन्ना (Sugarcane): 475.6 मिलियन टन (कुल उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा)।
- खाद्यान्न (Foodgrains): 173.3 मिलियन टन (चावल, मक्का, दालें आदि)।
- तिलहन (Oilseeds): 27.6 मिलियन टन (सोयाबीन, मूंगफली)।
2. ज्यादा बारिश: वरदान या अभिशाप? (The Rainfall Factor)
इस साल मानसून सामान्य से अधिक रहा और कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बने। आमतौर पर माना जाता है कि ज्यादा बारिश फसल खराब करती है, लेकिन इस बार इसका सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact) नकारात्मक से ज्यादा रहा:
- जल-सघन फसलों (Water-Intensive Crops) को फायदा: धान (Rice) और गन्ना ऐसी फसलें हैं जिन्हें बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है। अच्छी बारिश ने इन फसलों की बंपर पैदावार सुनिश्चित की।
- बुवाई का रकबा बढ़ा (Increased Acreage): जलाशयों और मिट्टी में नमी अच्छी होने के कारण किसानों ने ज्यादा क्षेत्र में बुवाई की, विशेषकर उन इलाकों में जहां आमतौर पर पानी की कमी रहती है।
- नुकसान की भरपाई: हालाँकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गुजरात जैसे राज्यों में बाढ़ से कुछ फसलों (जैसे कपास और सोयाबीन) को नुकसान हुआ, लेकिन पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुई बंपर पैदावार ने उस नुकसान की भरपाई कर दी।
3. प्रमुख फसलों का रिकॉर्ड प्रदर्शन
| फसल | अनुमानित उत्पादन (2025-26) | पिछले साल से तुलना |
| चावल (Rice) | 124.5 मिलियन टन | रिकॉर्ड स्तर: पिछले साल से 1.7 मिलियन टन ज्यादा। |
| मक्का (Maize) | 28.3 मिलियन टन | भारी उछाल (3.5 मिलियन टन की वृद्धि)। |
| गन्ना | 475.6 मिलियन टन | पिछले साल से 21 मिलियन टन ज्यादा। |
| दलहन (Pulses) | 7.4 मिलियन टन | अरहर (Tur) और मूंग के उत्पादन में सुधार। |
| सोयाबीन | 14.3 मिलियन टन | बारिश से कुछ नुकसान के बावजूद अच्छा उत्पादन। |
4. इसका आम आदमी पर क्या असर होगा?
- चावल और दाल की कीमतें: चावल का रिकॉर्ड उत्पादन और अरहर (तूर) दाल की बेहतर पैदावार से आने वाले महीनों में इनकी कीमतों में नरमी (राहत) देखने को मिल सकती है।
- इथेनॉल और चीनी: गन्ने का रिकॉर्ड उत्पादन चीनी की कीमतों को स्थिर रखेगा और इथेनॉल ब्लेंडिंग (petrol blending) के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था: ज्यादा उत्पादन का सीधा मतलब है कि किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा, जिससे ग्रामीण मांग (rural demand) बढ़ेगी।
निष्कर्ष:
कुदरत की मार (अत्यधिक बारिश) के बावजूद भारतीय कृषि की यह उपलब्धि दिखाती है कि हमारे किसान और नई बीज किस्में अब जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की चुनौतियों को बेहतर ढंग से झेलने में सक्षम हो रहे हैं।