महंगाई के इस दौर में खेती की बढ़ती लागत (Input Cost) किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। खाद, बीज और कीटनाशकों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को ‘सहफसली खेती’ (Intercropping Method) अपनाने की सलाह दी है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें ‘एक पंथ, तीन काज’ वाली कहावत चरितार्थ होती है।

अगर आप भी अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं, तो एक ही खेत में सब्जी, दाल और फूलों की खेती एक साथ करके देखें। आइए जानते हैं यह तकनीक कैसे काम करती है और इसके क्या फायदे हैं।

क्या है सहफसली खेती का यह मॉडल?

आसान भाषा में कहें तो, खेत के मुख्य हिस्से में सब्जी (जैसे- गोभी, टमाटर, मिर्च) लगाना, कतारों के बीच में खाली जगह पर दलहनी फसलें (चना, मेथी, मूंग) लगाना और खेत की मेड़ या बॉर्डर पर फूल (गेंदा/Marigold) लगाना ही यह मॉडल है। इसे मिश्रित खेती या इंटरक्रॉपिंग भी कहते हैं।

1. यूरिया-डीएपी का खर्चा कैसे बचेगा?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब आप खेत में सब्जियों के साथ दलहनी फसलें (Pulses) लगाते हैं, तो दाल वाले पौधों की जड़ों में ‘राइजोबियम’ नाम का बैक्टीरिया पनपता है। यह बैक्टीरिया वातावरण से नाइट्रोजन खींचकर जमीन में जमा करता है।

  • फायदा: इससे जमीन प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनती है और आपको बाजार से यूरिया खरीदकर डालने की जरूरत बहुत कम पड़ती है।

2. कीटनाशकों (Pesticides) की बचत कैसे होगी?

खेत के चारों तरफ या बीच में गेंदे (Marigold) या सूरजमुखी के फूल लगाने से बहुत बड़ा फायदा होता है।

ट्रेंडिंग

  • फायदा: गेंदे का फूल ‘ट्रैप क्रॉप’ (Trap Crop) का काम करता है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े और इल्लियां, मुख्य सब्जी को छोड़कर फूलों के चमकीले रंग की तरफ आकर्षित हो जाती हैं। इससे आपकी महंगी सब्जी सुरक्षित रहती है और कीटनाशक का हजारों रुपये का खर्चा बच जाता है।

3. ‘रिस्क फ्री’ खेती और दोगुनी आय

पारंपरिक खेती में अगर ओलावृष्टि या बीमारी से फसल खराब हो जाए, तो किसान के हाथ कुछ नहीं लगता। लेकिन इस मॉडल में:

  • अगर सब्जी के भाव गिर गए, तो आप फूल बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं।
  • अगर मौसम की मार पड़ी, तो जमीन के नीचे उगने वाली दाल या कंदवर्गीय फसलें सुरक्षित रहती हैं।
  • फूलों की बिक्री से किसान को हर दिन या हफ्ते में नकद पैसा मिलता रहता है, जिससे घर का खर्च आसानी से चलता है।

किन फसलों का कॉम्बिनेशन है बेस्ट?

किसान भाई मौसम के हिसाब से इन फसलों का चयन कर सकते हैं:

  1. गोभी + मटर/चना + गेंदा (सर्दियों के लिए बेस्ट)
  2. टमाटर + लोबिया + गेंदा
  3. बैंगन + मेथी/धनिया + गेंदा

विशेषज्ञों की राय

पूसा कृषि संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में छोटी जोत (कम जमीन) वाले किसानों के लिए यह तकनीक वरदान है। इससे न केवल प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सालों-साल अच्छी बनी रहती है।